किसान आंदोलन, ट्रैक्टर परेड व हिंसा, जिम्मेदार कौन? -सूर्य प्रकाश शुक्ल (पत्रकार)

The Natural News Wed Jan 27 2021

26 जनवरी 2021 को पूरा भारत देश 72 वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मना रहा था, देश की राजधानी दिल्ली में राजपथ पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति सहित सभी विशिष्ट जनों की उपस्थिति में मुख्य कार्यक्रम आयोजित था| credit: third party image reference

भारत के लगभग सभी प्रदेशों, सभी सरकारी विभागों की आकर्षक झांकियां निकाली जा रहीं थी, तभी उसी समय दिल्ली की सीमाओं पर किसान भी लाखों की संख्या में ट्रैक्टर परेड निकालने के लिए भारतीय तिरंगे झंडे व अपने संगठनों जिसको की संयुक्त किसान मोर्चा बनाया गया है द्वारा पूर्व नियोजित परेड समय से पूर्व ही दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर, सिंधु बॉर्डर तथा टिहरी बॉर्डर से दिल्ली की सीमाओं में प्रवेश कर गये, पुलिस रोक नहीं पाई तथा यह धीरे-धीरे राजधानी दिल्ली की महत्वपूर्ण सड़कों पर ट्रैक्टर परेड निकालने लगे, किसानों की भीड़ बहुत अधिक थी|credit: third party image reference

पुलिस तथा किसानों के बीच दिल्ली के आईटीओ चौराहे, गाजीपुर सहित कई जगहों पर हिंसक झड़प, पत्थरबाजी, मारपीट की घटनाएं हुई| पुलिस द्वारा लाठीचार्ज भी किया गया तथा आंसू गैस के गोले तक छोड़े गए लेकिन सब कुछ नाकाफी साबित हुआ| भीड़ ने दिल्ली लाल किले पर भी कब्जा कर लिया तथा वहां पर विभिन्न संगठनों ने अपना झंडा लगा दिया, उस समय स्थिति ऐसी बनी कि, भीड़ जिसमें कुछ किसान व अराजक तत्व भी थे अपना प्रदर्शन कर रहे थे तथा पुलिस वाले दर्शकों की भांति बैठकर प्रदर्शन को देख रहे थे, दिल्ली में स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि आज कुछ भी हो सकता था| आज हम स्पष्ट रूप से कहे तो बहुत बड़ा नरसंहार होने से किसी प्रकार बचा, जिसमें किसान व पुलिसकर्मी ही थे, असंख्य लोगों की जानें जा सकती थी|credit: third party image reference

आज राजधानी दिल्ली में जो हुआ, लगातार किसान संगठन के नेताओं राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव सहित तमाम लोगों के लगातार आग्रह व निर्देश के बाद भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था| राहुल गांधी ने भी अपने तरीके से इसको रोकने के लिए प्रयास किया| मुझे इतना तो अवश्य महसूस हो रहा है कि यह हिंसा करने वाले लोग किसी न किसी अराजकता पैदा करने वाली गलत साजिश के बहकावे में आ गए, किसान ऐसा नहीं कर सकते थे| इस प्रकार हिंसा फैला कर वे इतना तो समझ ही रहे होंगे कि इससे हमारे उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो सकती, जरूर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है| जो किसान आंदोलन लगातार दिल्ली बॉर्डर पर 2 माह से शांतिपूर्वक चल रहा था, उसको बदनाम करने की साजिश का परिणाम यह हिंसा थी|credit: third party image reference

जैसा कि संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा कहा भी गया है, कि गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड शांतिपूर्वक संपन्न हो गया है अब 1 फरवरी 2021 को बजट के पारित होने वाले दिन संसद तक पैदल मार्च निकालेंगे| कुछ जगहों पर जो हिंसा व उपद्रव फैलाया गया वह अराजक तत्व थे जो किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए हिंसा व उपद्रव करवा रहे थे|

मुझे सबसे अधिक आश्चर्य हो रहा है और कष्ट भी हो रहा है, किसानों द्वारा लगातार दो माह से दिल्ली जो कि देश की राजधानी है वहां पर इस जाड़े के मौसम में विभिन्न किसान संगठन, संयुक्त किसान मोर्चा बनाकर शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे हैं| गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सहित असंख्य लोगों के बीच आंदोलन समाप्त करने के लिए ग्यारह बार मीटिंग हुई, जो बेनतीजा रही| सरकार ऐसा कौन सा हित किसानों के लिए इस कानून के द्वारा उत्पन्न कर देगी कि किसानों की परेशानियां समाप्त हो जाएंगी, जब किसान संगठन इस कानून को स्वीकार नहीं करना चाहता तो आखिर सरकार अपनी जिद पर क्यों अड़ी हुई है? निश्चय ही इस में सरकार द्वारा जिद करना, हठवादी रवैया अपनाना अच्छी बात नहीं है|credit: third party image reference

सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि उन्हीं किसानों ने खुशी-खुशी उसे वोट देकर सत्ता की कुर्सी सौंपी है, जिसको न छोड़ने के लिए राजनीतिक अहंकार की भावना हम किसानों के समक्ष दिखा रहे हैं| अगर अमित शाह गृह मंत्री, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा कृषि मंत्री किसानों को संतुष्ट नहीं कर पा रहे हैं तो क्या प्रधानमंत्री जी अगर किसानों की समस्या के समाधान के लिए अगर कानून समाप्त करने की घोषणा कर ही देते हैं, तो इससे उनकी गरिमा बढ़ेगी ही| आज गणतंत्र दिवस पर वे किसानों की परेशानी तथा उसके समाधान के लिए किए जा रहे आंदोलन की समाप्ति के लिए आगे आकर पहल करते तो उससे अच्छी कोई दूसरी बात नहीं हो सकती थी| क्योंकि सभी लोग जानते हैं कि प्रधानमंत्री जी के हाथों में सत्ता की चाभी है, सरकार को निश्चय ही सकारात्मक पहल करने के लिए आगे आना चाहिए तथा किसान हित के लिए नई घोषणा करनी चाहिए जिससे किसान आर्थिक रुप से खुशहाल हो सके तथा उनका आंदोलन समाप्त हो सके|

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