आख़िर क्यो सरकार इन किसानों को आतंकवादी, नक्सलवादी बताकर देश में हिंसा फला रही है

sukhpalsidhuz Tue Feb 02 2021

नई दिल्ली: दिल्ली सीमाओं पर विभिन्न विरोध प्रदर्शनों के लिए प्रसिद्ध किसानों के समूह ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों का डटकर विरोध किया जा रहा है । यह विरोध प्रदर्शन को 67 दिन हो गए है । पिछले कुछ दिनों से , गणतंत्र दिवस पर हिंसा ओर पहले के कुश दिनों से, आंदोलन तेज हो गया, खासकर राष्ट्रीय राजधानी में। पिछले दो या तीन दिनों में से , सुरक्षा उद्देश्यों को , इन क्षेत्रों (जैसे सिंधु, गाजीपुर , पंजाब और टिकरी) के कई इलाकों में सैनिकों को तैनात किया गया है। कई लोगों को "किसान एकता ज़िंदाबाद" (दीर्घकालिक किसान एकता) और "जय जवान, जय किसान" जैसे नारे लगाते हुए सुना जा सकता है।

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बजट बैठक के पहले दिन सभी दलों ने राष्ट्रपति के भाषण का बहिष्कार करने के बाद, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कल विपक्ष से संपर्क किया, यह कहते हुए कि सरकार अभी भी किसानों से बात करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि 18 महीने के लिए तीन कृषि कानूनों को निलंबित करने का एक और प्रस्ताव है।

बाकी सभी दलों ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का जमकर विरोध किया और किसानों को आतंकवादी, नक्सलवादी बताने की आलोचना की| आम आदमी पार्टी ने इन तीनों काले कानूनों को जल्द से जल्द रद करने की अपील करी | आम आदमी पार्टी ने किसानों के हक़्क़ की बात करी और उन्होंने किसानों पर अत्त्याचार करने का वी आरोप लगाया | बीजेपी सरकार की मानसिक्ता किसान अंदोलन को लेकर बदल चुक्की है बह सब कुश प्राइवेट सैक्टरो को बेचना चाहती है| 

हमारे देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी इन तीन कृषि कानूनो को लाग्गू करके अंबानी , अडानी को सभ कुश सौंपना चाहती है| किसान जथेबंदिओं में कहा के, कुश शरारती अहंसरो को बीजेपी और RSS हिंसा फैलाने की कोसिस कर रही है| आंदोलन पूरी तरह से शान्तमयी ढंग से चल रहा है| 

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